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भारत सरकार ने कृषि कल्याण सेस (KKC) 01/06/2016 से लगाने का निर्णय किया है जो की टैक्सेबल वैल्यू पर 0.50% की दर से लगेगी । उदहारण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति ऑफिस को किराये पर देता हैं तो सर्विस टैक्स और सेस मिलाकर प्रभावी दर 14.50% से बढ़कर 15% हो जायेगी यानि 1 लाख रुपये पर 14,500/- की जगह 15,000/- रुपये टैक्स के रूप में लगेंगे ।

एबेटमेंट या डिडक्शन

फाइनेंस बिल 2016 की धारा 158 में लिखा गया है की सर्विस टैक्स के सारे प्रावधान और नियम कृषि कल्याण सेस में भी लागू होंगे यानि जिस एक्टिविटी पर जितने प्रतिशत का एबेटमेंट या डिडक्शन मिलता हैं, उतने ही प्रतिशत की छूट (KKC) में भी मिलेगी । साथ ही साथ सर्विस टैक्स नोटिफिकेशन 28-2016 दिनांक 26/05/2016 में स्पष्ठ तौर पर कहा गया है की जिस एक्टिविटी में टैक्सेबल सर्विस की वैल्यू Service Tax (Determinaiton of Value) Rules 2006 या एबेटमेंट नोटिफिकेशन 26-2012 के अनुसार निर्धारित होती है, उसमे KKC की प्रभावी दर वही होगी जो सर्विस टैक्स की हैं ।
उदहारण के तौर पर सड़क मार्ग से माल परिवहन करने पर 70% का एबेटमेंट है तो रेस्टोरेंट में खाना खाने पर 60% का डिडक्शन है । यानि गुड्स ट्रासंपोर्ट एजेंसी के बिल में सर्विस टैक्स, सेस मिलाकर प्रभावी दर 4.50% हो जायेगी जो कल तक (31/05/2016) तक 4.35% था और रेस्टोरेंट में 5.80% से बढ़कर 6% |

एक्सेम्पशन

जिन एक्टिविटी पर सर्विस टैक्स में एक्सेम्पशन है या जिनका उल्लेख निगेटिव लिस्ट में हैं, उस पर कृषि कल्याण सेस भी नहीं लगेगा । उदहारण के तौर पर सड़क निर्माण की सेवा हो या फिर स्कूल - कॉलेजों को दी जानी वाली फी ।

रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM)

सर्विस टैक्स नोटिफिकेशन 27-2016 दिनांक 26/05/2016 में यह स्पष्ठ तौर पर कह दिया गया हैं की KKC की गणना रिवर्स चार्ज के लिये नोटिफिकेशन 30-2012 दिनांक 20/06/2012 के अनुसार होगी । यानि Point of Taxation Rules 2011 का नियम 7 लागू होगा जिसके अनुसार रिवर्स चार्ज में टैक्स की देनदारी उस समय आती है जब आप वेंडर को इनवॉइस का पेमेंट कर देते है बशर्ते पेमेंट इनवॉइस डेट से 3 महीने में हो जाये । अगर ऐसा नहीं होता है यानि पेमेंट (इनवॉइस वैल्यू) 3 महीने में नहीं होता हैं, तो देनदारी रिवर्स चार्ज में देनदारी इनवॉइस डेट से 3 माह खत्म होने के अगले दिन की होगी ।

साथ ही साथ यह भी लिखा गया है की कोई एक्टिविटी जिस पर रिवर्स चार्ज हैं और नियमो में कोई बदलाव आने से रिवर्स चार्ज में लायबिलिटी सर्विस रिसीवर की घटती है या बढ़ती है और उसका भुगतान जिस दिन से नियम बदलता है, तब तक नहीं हुआ हैं तो POT के अनुसार रिवर्स चार्ज में लायबिलिटी इनवॉइस डेट की होगी बशर्ते सर्विस भी बदलाव के पहले प्रदान कर दी गयी हो और इनवॉइस भी उसके पहले का है | 

उदहारण के तौर पर, अगर किसी प्राइवेट लिमिटिड कंपनी को वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट में रिवर्स चार्ज का भुगतान करना है और कांट्रेक्टर का बिल 18/02/2016 का है और उसका भुगतान अब तक नहीं हुआ है यानि 3 महीने बीत चुके हैं, तो रिवर्स चार्ज में देनदारी 19/05/2016 को आ जाएगी और देय डेट (Due Date) 06/06/2016 हो जायेगी। टैक्स का पेमेंट जितने देरी से होगा, उतने दिन का इंटरेस्ट लगेगा । भुगतान आज करने पर भी KKC नहीं लगेगा क्योंकि उस दिन KKC नहीं था । साथ ही साथ यह आधार भी लिया जा सकता हैं की सर्विस 01/06/2016 के पहले प्रदान कर दी गयी हैं और इनवॉइस डेट भी 31/05/2016 तक का हैं ।

सरल भाषा में यह कह सकते हैं की KKC के देनदारी उसी इनवॉइस पर होगी जिसमे सर्विस या तो 01/06/2016 को या उसके बाद प्रदान की गयी है (या) फिर इनवॉइस 01/06/2016 को या उसके बाद बना हैं । अगर कोई इनवॉइस 01/06/2016 के पहले का हैं और उसका भुगतान आज यानी 01/06/2016 को या उसके बाद होता हैं तो भी KKC नहीं लगेगा । लेकिन विभाग विवाद खड़ा कर सकता हैं और कहेगा की नहीं हम तो POT का नियम 5 मानेंगे जिसका विवेचन हम आगे कर रहे हैं ।

फॉरवर्ड चार्ज

सर्विस प्रदाता को जब सर्विस टैक्स का भुगतान करना होता हैं तो उसे आम बोलचाल की भाषा में फॉरवर्ड चार्ज कहते हैं । अगर कोई नया टैक्स आता है तो POT का नियम 5 लागू होगा जिसके अनुसार नये टैक्स में देनदारी नहीं आयेगी अगर (क) इनवॉइस और पेमेंट, दोनों की तारीख 31/05/2016 तक है, या (ख) पेमेंट तो 31/05/2016 तक आ गया हैं और इनवॉइस डेट 14/06/2016 तक का है ।

यानि टैक्सेबल सर्विस का जो Sundry Debtors 01/06/2016 को खड़ा हैं उस पर KKC का भुगतान करना होगा भले ही उस पर जो सर्विस टैक्स और स्वच्छ भारत सेस की देनदारी बनती हैं, accrual basis पर उसका भुगतान पहले ही हो गया हो । पढ़ने में अटपटा लग रहा है और मेरा यह मानना हैं की अगर कोई व्यक्ति यह आधार ले की जिस दिन का इनवॉइस हैं या सर्विस दी गयी हैं, उस दिन तो KKC था नहीं, विभाग नहीं मानेगा और विवाद होगा ।

याद रखे- 

1. एक्सपोर्टर को एक्सपोर्ट ऑफ सर्विस में सर्विस टैक्स के साथ KKC रिफंड भी मिलेगा । {नोटिफिकेशन 29-2016}
2. KKC के भुगतान के लिये एकाउंटिंग कोड 00441509 होगा ।
3. KKC का सेनवेट क्रेडिट सर्विस प्रोवाइडर को ही मिलेगा लेकिन उसका एडजस्टमेंट केवल KKC के साथ ही करना होगा। {नोटिफिकेशन 28-2016 (NT)}
4. रिबेट / रिफंड की सुविधा SEZ Unit और डेवलपर को भी होगी और उसके लिये आवश्यक बदलाव नोटिफिकेशन 12-2016 में किया गया है ।
5. एयर ट्रेवल एजेंट, मनी चेंजर आदि जो सर्विस टैक्स का भुगतान सर्विस टैक्स नियम 1994 के नियम 6 के sub rules (7, 7A, 7B, 7C) के अनुसार करते है , उसमे KKC की गणना होगी, इस तरह - (सर्विस टैक्स की देनदारी * 0.50% / 14%) {नोटिफिकेशन 31-2016}

Accounting Code

Tax Collection           Other Reciepts (Interest)          
Penalties           
00441509 00441510  00441512 

 

इसलिए, 1 जून से, सर्विस टैक्स की प्रभावी दर 15% होगा अर्थात

Particulars                                            Amount
Service Tax  14% 
Swatch Bharat Cess  0.5% 
Krishi Kalyan Cess  0.5% 
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